Saturday, 14 October 2017

ध्रुवो जन्म मृतस्य च

जर्जर संवेदना
घायल धैर्य
टूटा साहस
बूढ़ा पुरुषार्थ
रुग्ण पराक्रम
मृत्यु को प्राप्त हों
अपने समस्त मानवीय गुणों के साथ
यथाशीघ्र
शीघ्रातिशीघ्र 

Wednesday, 26 April 2017

निस्सीम

मैंने फिर लिखा
फिर मिटाया
न जाने कितनी बार
ऐसा नहीं है माँ !
कि मुझे लिखना नहीं आता
तुम हो कि
शब्दों में
समाती ही नहीं