Monday, 12 September 2016

अमरबेल

आप अवसर दें
चाहे ना दें
हम तो आपके सेवक थे
हैं
और रहेंगें

वैसे भी हमारा
चोली दानम का साथ है
स्पष्ट सी बात है
लोकतंत्र में आप "लोक " हैं तो हम "तंत्र " हैं
हमारे पास
वशीकरण
मोहन , उच्चाटन , मारण
सभी प्रकार के मंत्र हैं

आप राजा हैं
हम कामगार हैँ
आपके सम्राज्य के
पहरेदार हैँ
आपकी सेवा पर
हमारा अधिकार है

बिना हमारे
आपकी गति नहीं
सुगति नहीं
प्रगति नहीं

इस रक्त संबंध को
रखना है आबाद
इसलिये बोलिये
नेताजी जिन्दाबाद

Friday, 2 September 2016

मा फलेषु कदाचन ...

अपना प्रतिनिधि चुनना
हमारा अधिकार
वह क्या करेगा
कब करेगा
कितना करेगा
करेगा भी अथवा नहीं
यह उसका अधिकार 

Monday, 29 August 2016

तुम्हारा होना

तुम्हारा होना

सब कुछ कितना सजीव था
जब तुम थे
आज भी सब कुछ है
अतिरिक्त तुम्हारे
अनाकर्षक
निष्प्राण
कितना अंतर है
तुम्हारे होने और
न होने में 

Monday, 22 August 2016

यदा यदा हि

यदा यदा हि

अन्याय की भादो रात में
यंत्रणा की मूसलाधार वर्षा से
जन मन जमुना में जब
व्यथा बाढ़ आती है
अँधेरे की कोख से
उजाले का पैगम्बर
बंदी का मुक्त पुत्र
उसी क्षण जनमता है
वह पल रहा है
आज भी
किसी झोंपड़ी में
किसी गोप के घर

Thursday, 11 August 2016

सर्वश्रेष्ठ 

जब कभी तेज हो जाती है
धूप
याद आ जाता है
तुम्हारा आँचल
कोई विकल्प नहीं
ममता का 

Friday, 5 August 2016

स्वतन्त्र पहचान 

अनुसूचित
आरक्षित
पिछडा
अति पिछडा
अल्पसंख्यक
दलित
महादलित
ये सब
मेरी स्वतन्त्र पहचान

Thursday, 28 July 2016

सत्यमेव जयते
                                                    न्याय संहिता की ऋचा अगम्य
                                                    न्याय
                                                    निराकार ईश्वर की भांति
                                                    दुर्लभ
                                                   तप - स्थली  न्यायालय
                                                   सारे ऋषि - मुनि  वकील और न्यायाधीश
                                                  जीत के पक्ष मे
                                                  सत्य है 

Sunday, 24 July 2016

जंगल में दहशत

लोमडी ने चुरा ली है खरगोश की आँखें
झक सफ़ेद खद्दर का कुरता पहनकर
घूम रहा है भेंडिया
गिरगिट हैरान है
जंगल में दहशत है

Thursday, 21 July 2016

जीवन गाथा 
                              ऐसे उलझा तुम्हारे काले घने बालों की
                              उलझन सुलझाने में
                              कि
                             तुम्हारे गालों तक तो
                             पहुंच ही नहीं पाया

Tuesday, 19 July 2016

गुरू नमन

मैं

बार बार ठगा जाता हूँ

चेहरों से

अच्छा है

ज्ञान का

कोई चेहरा नही होता
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