Monday, 22 August 2016

यदा यदा हि

यदा यदा हि

अन्याय की भादो रात में
यंत्रणा की मूसलाधार वर्षा से
जन मन जमुना में जब
व्यथा बाढ़ आती है
अँधेरे की कोख से
उजाले का पैगम्बर
बंदी का मुक्त पुत्र
उसी क्षण जनमता है
वह पल रहा है
आज भी
किसी झोंपड़ी में
किसी गोप के घर

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