Monday, 29 August 2016

तुम्हारा होना

तुम्हारा होना

सब कुछ कितना सजीव था
जब तुम थे
आज भी सब कुछ है
अतिरिक्त तुम्हारे
अनाकर्षक
निष्प्राण
कितना अंतर है
तुम्हारे होने और
न होने में 

Monday, 22 August 2016

यदा यदा हि

यदा यदा हि

अन्याय की भादो रात में
यंत्रणा की मूसलाधार वर्षा से
जन मन जमुना में जब
व्यथा बाढ़ आती है
अँधेरे की कोख से
उजाले का पैगम्बर
बंदी का मुक्त पुत्र
उसी क्षण जनमता है
वह पल रहा है
आज भी
किसी झोंपड़ी में
किसी गोप के घर

Thursday, 11 August 2016

सर्वश्रेष्ठ 

जब कभी तेज हो जाती है
धूप
याद आ जाता है
तुम्हारा आँचल
कोई विकल्प नहीं
ममता का 

Friday, 5 August 2016

स्वतन्त्र पहचान 

अनुसूचित
आरक्षित
पिछडा
अति पिछडा
अल्पसंख्यक
दलित
महादलित
ये सब
मेरी स्वतन्त्र पहचान